Sunday, 7 August 2011

बस यूँ ही.....

आज पूरी रात सो न सकी, दिल में इतना दर्द था की रो न सकी...
कहने को तो बहुत सी बातें थीं, पर जुबां साथ दे न सकी ...,
देख के उनको बरसों बाद खुशी तो बहुत हुई, लेकिन आँखें भी ये कह न सकीं...
जानते हैं हम कि वो खुश है हमारे बिना, चाहत हमारी भी है उसको खुश देखने की, लेकिन आज जब वो दूर गया तो हँसते हुए उसे क्यों विदा न कर सकी............

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